धर्मपाल महेंद्र जैन

व्यंग्यकार, कवि 


प्रकाशन :  

        उपन्यास- इमिग्रेंट


        व्यंग्य संकलन (8)- "साहित्य की गुमटी",“गणतंत्र के तोते", "चयनित व्यंग्य रचनाएँ", "डॉलर का नोट”, “भीड़ और भेड़िए”, "इमोजी की मौज में", “दिमाग वालो सावधान” एवं “सर क्यों दाँत फाड़ रहा है” 

        

        कविता संकलन (4)- "अधलिखे पन्ने", “कुछ सम कुछ विषम”,“इस समय तक” (कविता संकलन) प्रकाशित।

अंग्रेजी में- Friday Evening : Verses of Vivid moods तीस से अधिक साझा संकलनों में सहभागिता।


        आलोचनात्मक- 1. धारदार धर्मपाल, 

                                   संपादक - आर पी तोमर

       2. धर्मपाल महेंद्र जैन की रचनाधर्मिता

       संपादक- डॉ. दीपक पांडेय व डॉ. नूतन पांडेय