धर्मपाल महेंद्र जैन

व्यंग्यकार, कवि


प्रकाशन : “डॉलर का नोट”, “भीड़ और भेड़िए”, “दिमाग वालो सावधान” एवं “सर क्यों दाँत फाड़ रहा है” (व्यंग्य संकलन) एवं “कुछ सम कुछ विषम”,“इस समय तक” (कविता संकलन) प्रकाशित। पच्चीस से अधिक साझा संकलनों में सहभागिता।

स्तंभ लेखन : चाणक्य वार्ता (पाक्षिक), सेतु (मासिक) एवं विश्व गाथा में व्यंग्य

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