जनसत्ता 25 जनवरी, 2026
जनसत्ता 25 जनवरी, 2026
इमिग्रेंट अब तक रचे गए उस साहित्य में ध्यानाकर्षित करता है, जो दूर देश जा बसे रचनाकारों की कलम से लिखा गया साहित्य है. विशेष रूप से इस साहस के कारण भी जो उपन्यास में दर्ज हुआ है। उपन्यासकार ने सृजनात्मक लेखन के फलक पर व्यंग्यकार के रूप में अपनी पहचान क्रमश: प्रगाढ़ की है, यह उपन्यास उनके अगले चरण निक्षेप को प्रस्तावित करता है.
विजया सती, आलोचक
इमिग्रेंट उपन्यास के रचयिता धर्मपाल महेंद्र जैन ‘विडम्बनाओं की गहरी पहचान रखने वाले व्यंग्यकार के रूप में’ जाने जाते हैं. इमिग्रेंट उपन्यास में वे ‘प्रवासी लेखन के नोस्टेल्जिया और तुलना के व्यामोह से बाहर आकर’ अपने व्यापक वैश्विक अनुभवों को अंकित करते हुए चकित करते हैं’.
संतोष चौबे, ‘नया देश नई कहानी’ शीर्षक भूमिका से